दोस्तों की महफ़िल में
चमकता सितारा हो तुम ,
रात का चिराग
और दिन का उजाला हो तुम ,
वैसे तो हजारों हैं
जिंदगी के सफर में,
दिल की धड़कन का
एकमात्र सहारा हो तुम ।
सूरज की पहली किरण
और मेरा पहला ख्याल हो तुम ,
एक गुमराह मुसाफिर के
जीने का सवाल हो तुम ,
ऐ हसीं दोस्त-
ये महज़ आँखों का धोखा है
या सच में मेरी हमराह हो तुम ।।
या सच में मेरी हमराह हो तुम ।।
